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खरपतवार प्रबंधन

खरपतवार प्रबंधन

खरपतवार नियंत्रण

खरपतवार मुख्य फसल से नमी, पोषक, प्रकाष आदि के लिये प्रतिस्पर्धा करते है अतः इनका खेत से निकाला जाना जरूरी है। खरपतवार नियंत्रण से खेत में डाले गये खाद एवं उर्वरकों का उपयोग चने के पौधों द्वारा होने से उपज में वृद्धि होती है तथा पौधों में समुचित मात्रा में प्रकाष एवं वायु संचार होता है।

बारानी क्षेत्रों में बुवाई के 5-6 सप्ताह बाद तक निराई गुड़ाई अवष्य करें। सिंचित चने में सिंचाई के बाद बतर आने पर निराई गुड़ाई अवष्य करें। रसायनों द्वारा खरपतवार नियंत्रण के लिये पेन्डिमेथालिन (30 ई.सी.) खरपतवारनाषी के व्यापारिक उत्पाद की 2.400 किलोग्राम मात्रा को 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टेयर की दर से बुवाई के बाद तथा बीज के उगने से पूर्व एक समान छिड़काव करें। तदोपरान्त प्रथम सिंचाई के बाद कसिये की सहायता से एक बार गुड़ाई करना लाभदायक रहता है। खेत की ऊपरी सतह में नमी होने पर यह खरपतवारनाषी रसायन अधिक प्रभावषाली होता है। इससे शुरूआती मौसमी खरपतवारों जैसे बथुआ आदि पर काफी नियंत्रण हो जाता है।

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