चना : बुवाई एवं खेत की तैयारी
फसल क्रम, खेत का चुनाव, खेत की तैयारी और भूमि उपचार की जानकारी — Rabi POP Zone 1-B के आधार पर।
चना की खेती के लिए खेत तैयार करने की जानकारी
फसल क्रम
चना के लिए दिए गए फसल-चक्र
पड़त – चना
संदर्भ में चना के लिए दिए गए फसल क्रम में शामिल।
बाजरा – चना
बाजरा के बाद चना को फसल क्रम में लिया गया है।
खेत का चुनाव
चना की फसल के लिए भूमि चयन
उचित भूमि का चुनाव करें
चना हल्की व भारी दोनों प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है।
चना की फसल के लिए लवणीय एवं क्षारीय भूमि, जहां जल निकास की समस्या हो, उपयुक्त नहीं हैं।
खेत की तैयारी
मिट्टी और पिछली फसल के अनुसार खेत तैयार करने के निर्देश
बलुई, मध्यम एवं भारी मिट्टी
बलुई पड़त खेतों में गर्मी के दिनों में जुताई न करें। मध्यम व भारी मिट्टी के खेतों में गर्मी व वर्षा के दिनों में एक या दो जुताई करें। सूखने की कोई आवश्यकता नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर पलेवा देकर एक बार खेत की और जुताई करें। बागानी क्षेत्र में प्रत्येक जुताई के साथ पाटा लगावें।
सिंचित परिस्थितियों में पिछली फसल के बाद
सिंचित परिस्थितियों में बाजरा अथवा मूंग की कटाई के बाद यदि चना लिया जाता है तो खेत तैयार कर यथाशीघ्र बुवाई करें।
भूमि उपचार
दीमक, जड़गलन एवं उकठा जैसे रोग/कीटों की रोकथाम के लिए संदर्भित उपाय
खेत में दीमक, कटवर्म, जड़गलन तथा उकठा आदि समस्याओं के प्रकोप को कम करने के लिए पुस्तक में निम्न उपचार बताए गए हैं।
दीमक व कटवर्म की रोकथाम
दीमक व कटवर्म के प्रकोप से बचाव के लिए क्लोरपायरीफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 6 किग्रा प्रति बीघा अंतिम जुताई के समय खेत में भली प्रकार मिला दें।
दीमक नियंत्रण
चने की बुवाई से पूर्व दीमक प्रभावित क्षेत्र में क्लोरपायरीफॉस 20 ई.सी. 400 मिली. या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 200 मिली. या इमिडाक्लोप्रिड 600 एफ.एस. 250 ग्राम का 5 लीटर पानी में घोल बनाकर 100 किग्रा बीज के हिसाब से उपचारित करें। बीज को रात भर पतली परत में सूखने के लिए रखें एवं दूसरे दिन बुवाई के काम में लायें।
जड़गलन रोग से बचाव
जड़गलन रोग के अधिक प्रकोप से प्रभावित खेतों में बुवाई से पूर्व ट्राइकोडर्मा हर्जियानम (गेहूं का चोकर या पाउडर आधारित) 2.5 किग्रा को 50 किग्रा अर्द्धपकी गोबर की खाद में अच्छी तरह मिला कर 10–15 दिन के लिए छाया में रख दें। इस मिश्रण को बुवाई के समय प्रति बीघा की दर से पलेवा करते समय मिट्टी में मिला दें।
जड़गलन एवं उकठा रोग का जैविक नियंत्रण
जड़गलन एवं उकठा रोग के प्रभावी एवं जैविक नियंत्रण हेतु ट्राइकोडर्मा हर्जियानम एवं स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस जैव कारकों की प्रत्येक की 5 किग्रा मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 400 किग्रा केंचुआ खाद के साथ खेत तैयार करते समय भूमि उपचार करें तथा इन दोनों जैव कारकों की प्रत्येक की 4 ग्राम प्रति किग्रा बीज के आधार पर बुवाई से पूर्व बीज उपचार करके बुवाई करें।
यदि स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस उपलब्ध नहीं होता है तो भूमि उपचार के लिये ट्राइकोडर्मा हर्जियानम 10 किग्रा प्रति हेक्टेयर तथा बीज उपचार के लिये इसकी 8 ग्राम मात्रा प्रति किग्रा बीज के आधार पर उपयोग करना भी प्रभावी रहता है।