चना बीजोपचार एवं बुवाई
चना की बुवाई से पहले बीज उपचार, बुवाई का समय तथा बीज की मात्रा एवं बुवाई विधि की जानकारी।
चना की बुवाई एवं बीजोपचार
रबी चना फसल के लिए बुवाई से पूर्व बीज उपचार, उपयुक्त बुवाई समय तथा बीज मात्रा संबंधी जानकारी।
बीजोपचार
बुवाई से पहले बीज को उपचारित करने की विधियां
चना में बीजोपचार की अनुशंसित विधियां
रोग नियंत्रण, जैव उर्वरक एवं दीमक प्रभावित खेतों के लिए
ग्राम प्रति किग्रा. बीज के आधार पर बुवाई से पूर्व बीज उपचार करके बुवाई करें। यदि स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस उपलब्ध नहीं होता है तो भूमि उपचार के लिये ट्राइकोडर्मा हर्जियेनम 10 किग्रा. प्रति हेक्टेयर तथा बीज उपचार के लिये इसकी 8 ग्राम मात्रा प्रति किग्रा. बीज के आधार पर प्रयोग करना भी प्रभावी रहता है।
जड़गलन व उखड़ा की रोकथाम
जड़गलन व उखड़ा की रोकथाम हेतु बुवाई के पहले बीज को ट्राइकोडर्मा हर्जियेनम (पाउडर आधारित) 10 ग्राम या कार्बेन्डाजिम 50 डब्ल्यू.पी. 1.5 ग्राम या कार्बेन्डाजिम 25 एस.डी. 2.5 ग्राम प्रति किग्रा. के हिसाब से उपचारित करें।
राइजोबियम एवं पी.एस.बी. कल्चर (फॉस्फोरस घोलक जीवाणु)
राइजोबियम एवं पी.एस.बी. कल्चर (फॉस्फोरस घोलक जीवाणु) पाउडर के तीन पैकेट (600 ग्राम कल्चर) प्रति हेक्टेयर पर्याप्त है। बीज को बुवाई से एक घण्टे पूर्व उपचारित करने पर नत्रजन एवं फॉस्फोरस उर्वरकों की बचत की जा सकती है। इस संभाग के लिये पी.एस.बी. एवं राइजोबियम कल्चर से बीज उपचार लिये चने की उपज बढ़ाने में अधिक प्रभावकारी पाया गया गया है।
चना में सिफारिश किये गये उर्वरकों की पूरी मात्रा के साथ एक हेक्टेयर क्षेत्र के बीज को बुवाई से पूर्व तरल जैव-उर्वरकों राइजोबियम+पी.एस.बी. से 10 मिली. प्रति किग्रा. बीज से उपचारित करने के साथ वैम को 8 किग्रा. प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मिट्टी में देने पर प्रभावी पाया गया है।
दीमक प्रभावित खेतों में बीजोपचार
सिंचित व बारानी क्षेत्रों में चने की बिजाई से पूर्व दीमक प्रभावित खेतों में क्लोरपाइरीफॉस 20 ई.सी. 4 मिली. या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 2 मिली. या इमिडाक्लोप्रिड 600 एफ.एस. 2.5 ग्राम मात्रा को 50 मिली. पानी में घोल बनाकर 1 किग्रा. बीज के हिसाब से उपचारित करें। बीज को रात भर पतली परत में सूखने के लिए रखें एवं दूसरे दिन बुवाई के काम में लायें।
बुवाई का समय
सिंचित एवं बारानी चने के लिए
सिंचित चना
सिंचित चने की बुवाई 20 अक्टूबर से 15 नवम्बर तक करें, किन्तु सर्वोत्तम समय 25 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक का है।
बारानी चना
बारानी चने की अग्रिम बुवाई लाभदायक है एवं नमी को देखते हुए इसकी बुवाई अक्टूबर के प्रथम पखवाड़े से कर देनी चाहिए।
पछेती बुवाई
चने की पछेती बुवाई 25 नवम्बर तक 22.5 सेमी. लाइन से लाइन की दूरी रखते हुए बिना किसी हानि के की जा सकती है।
बीज की मात्रा व बुवाई विधि
किस्म एवं बुवाई के समय के अनुसार बीज दर
| किस्म / स्थिति | बीज की मात्रा | उपयोग |
|---|---|---|
| चना का प्रमाणित बीज | 15 किग्रा. प्रति बीघा | सामान्य बुवाई |
| मोटे दाने वाली किस्म GNG-469 (सम्राट) | 18 किग्रा. प्रति बीघा | समय पर बुवाई |
| पछेती बुवाई हेतु | 20 किग्रा. प्रति बीघा | पछेती बुवाई के लिए |
| मोटे काबुली चने | 25 किग्रा. प्रति बीघा | मोटे दाने वाली काबुली किस्मों के लिए |
| चना किस्म GNG-1488 की पछेती बुवाई (25 नवम्बर के बाद) |
15 किग्रा. प्रति बीघा | प्रमाणित बीज की मात्रा |
कतार से कतार की दूरी 30 सेमी. रखें। सिंचित क्षेत्र में बीज की गहराई …
चना की बुवाई, बीजोपचार एवं बीज मात्रा संबंधी कृषि जानकारी।