कृषि सूचना पोर्टल
‹
Gram Mitra कृषि एवं किसान कल्याण सूचना सेवा
🌾
उकठा रोग

उकठा रोग

उकठा (फ्यूजेरियम विल्ट) | कृषि रोग प्रबन्धन
🌱

उकठा (फ्यूजेरियम विल्ट)

चना फसल में रोग की पहचान एवं रोग प्रबन्धन

🔬 रोग की पहचान

उकठा मृदा एवं बीज जनित रोग है। यह रोग फ्यूजेरियम आक्सीस्पोरम फारमा स्पेसीज साइसराई नामक कवक से फैलता है। रोगी पौधों में ऊपर की पत्तियाँ और टहनियां मुरझा कर सूख जाती हैं। धीरे-धीरे पूरा पौधा सूखे भूसे की तरह मुरझा जाता है।

यदि रोगी पौधे की जड़ को बीच में से दो भागों में चीरा जाये तो बीच में सीधी लम्बी भूरे-काले रंग की धारी नजर आती है।

⚠️ रोगी पौधा — पत्तियाँ व टहनियाँ मुरझाती हैं
👁️ प्रमुख लक्षण
🍃

पत्तियों का मुरझाना

ऊपर की पत्तियाँ धीरे-धीरे मुरझाकर सूखने लगती हैं।

🌿

टहनियों का सूखना

रोग बढ़ने पर टहनियाँ भी मुरझाकर सूख जाती हैं और पूरा पौधा सूखे भूसे जैसा दिखाई देता है।

🔪

जड़ में भूरे-काले धब्बे

जड़ को बीच से काटने पर अंदर सीधी लम्बी भूरे-काले रंग की धारी दिखाई देती है।

🦠 रोगजनक: फ्यूजेरियम आक्सीस्पोरम फारमा स्पेसीज साइसराई नामक कवक।
मृदा एवं बीज जनित रोग
🛡️ रोग प्रबन्धन
01

उकठा रोग रोधी/सहनशील किस्मों जैसे जीएनजी-1581, जीएनजी-1958, जीएनजी-2144, जीएनजी-2171 जैसी किस्मों को उगाना चाहिये।

02

गर्मी के मौसम में गहरी जुताई कर खेत खुला छोड़ देने से कवक के बीजाणु नष्ट हो जाते हैं।

03

जिन खेतों में यह रोग अधिक पाया गया है, वहां तीन वर्षों तक चने की खेती न करें।

04

बुवाई से पहले बीजों का उचित बीज उपचार करें।

🌾 बीज उपचार के विकल्प

ट्राइकोडर्मा हरजीनियमपाउडर आधारित ट्राइकोडर्मा हरजीनियम 10 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित कर बुवाई करें।
कारबेन्डिजिम 50 डब्ल्यू.पी.कारबेन्डिजिम 50 डब्ल्यू.पी. 1.5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीज उपचारित कर बुवाई करें।
कृषि सलाह: रोग की प्रारम्भिक पहचान और उचित प्रबन्धन से फसल को होने वाले नुकसान को कम करने में सहायता मिल सकती है। ऊपर दी गई जानकारी POP Zone 1B के अनुसार प्रस्तुत की गई है।
← वापस श्रेणी पर जाएँ