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Dry Root Rot

शुष्क जड़गलन | ड्राई रूट रोट | कृषि रोग प्रबन्धन
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शुष्क जड़गलन (ड्राई रूट रोट)

चना फसल में रोग की पहचान एवं रोग प्रबन्धन

🔬 रोग की पहचान

शुष्क जड़गलन मृदा जनित रोग है। यह रोग राइजोक्टोनिया बटाटी-कोला नामक कवक से फैलता है। रोगी पौधों की पत्तियाँ व तना सूख जाता है। जड़ें अविकसित तथा काली होकर सड़ जाती हैं और रोगी पौधे की जड़ें आसानी से टूट जाती हैं।

जड़ों के ऊपर छोटे काले रंग के कवक के स्कलेरोषिया नामक बीजाणु देखे जा सकते हैं।

⚠️ सूखी पत्तियाँ • काली जड़ें • स्कलेरोषिया
👁️ प्रमुख लक्षण
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पत्तियाँ व तना सूखना

रोगी पौधों की पत्तियाँ और तना सूख जाते हैं।

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अविकसित व काली जड़ें

जड़ें अविकसित होकर काली पड़ जाती हैं और सड़ने लगती हैं।

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स्कलेरोषिया

जड़ों के ऊपर छोटे काले रंग के कवक के स्कलेरोषिया नामक बीजाणु दिखाई दे सकते हैं।

🦠 रोगजनक: राइजोक्टोनिया बटाटी-कोला नामक कवक।
मृदा जनित रोग
🛡️ रोग प्रबन्धन
01

रोग रोधी उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिये।

02

गर्मी के मौसम में गहरी जुताई कर खेत खुला छोड़ देने से कवक के बीजाणु नष्ट हो जाते हैं।

03

बुवाई से पहले बीजों को उचित फफूंदनाशी/जैविक उपचार से उपचारित करना चाहिये।

🌾 बीज उपचार के विकल्प

ट्राइकोडर्मा हरजेनियम पाउडर आधारित ट्राइकोडर्मा हरजेनियम को 10 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित कर बुवाई करें।
कार्बोक्सिन 37.5% + थायराम 37.5% चने में जड़गलन की रोकथाम हेतु कार्बोक्सिन 37.5 प्रतिशत + थायराम 37.5 प्रतिशत (75 प्रतिशत डब्ल्यू.एस.) से 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें।
कृषि सलाह: रोग की प्रारम्भिक पहचान और दिए गए रोग प्रबन्धन उपायों को अपनाने से फसल में रोग के प्रभाव को कम करने में सहायता मिल सकती है।
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